मुंबई लोकल ट्रेन बम विस्फोट कांड: विशेष पीठ के लिए वकीलों ने किया HC के रजिस्ट्रार से किया संपर्क

हिन्द सागर, मुंबई। मुंबई लोकल ट्रेन बम कांड मामले की सुनवाई जल्द से जल्द किये जाने के लिए मंगलवार को बचाव पक्ष के वकीलों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बचाव पक्ष के वकीलों और फरियादी पक्ष के वकीलों के संयुक्त हस्तक्षर हैं। वकीलों ने रजिस्ट्रार से अपील की है कि इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष पीठ बनाई जाये जैसे 26 /11 बम विस्फोट की सुनवाई करने लिए किया गया था। ताकि इस मामले में दोषियों को सजा और निर्दोषों को रिहा कराया जा सके।

वकीलों ने रजिस्ट्रार से यह भी सिफारिश किया है की पीठ के गठन करने से छह हफ्ता पहले वकीलों को इसकी जानकारी दें। क्योंकि इस मामले में आरोपियों का बचाव करने के लिए दिल्ली और चेन्नई से सीनियर वकील जीरह के लिए मुंबई आएंगे। इस लिहाज से उन्हें जीरह की तैयार के लिए वक्त की जरूरत होगी। रजिस्ट्रार को यह भी बताया गया के मुकदमा किसी भी बेंच के सामने सुनवाई के लिए पेश होता है तो बेंच मामले की प्रकृति को देखते हुए सुनवाई स्थगित कर देती है। पिछली सुनवाई के दौरान डबल बेंच के जस्टिस पृथ्वीराज चौहान और जस्टिस साधना जाधव ने मश्विरा दिया था की वह विशेष बेंच के गठन के लिए रजिस्ट्रार से सम्पर्क करें। क्योंकि रेगुलर बेंच इस मामले की सुनवाई करना मुमकिन नहीं है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने याचिका को रिकॉर्ड पर लिया और एड़. अंसार तंबोली को कहा के वह मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके पक्षों को सूचित करें। इस बीच, बचाव पक्ष के वकीलों ने सीआरपीसी की धारा 294 के तहत एक याचिका दायर की है, जिसमें अभियोजन पक्ष से मामले में कहा है कि वह इस मुक़दमे का हिस्सा बनने वाले कुछ दस्तावेजों को स्वीकार करें या उन्हें अस्वीकार करें। यदि अभियोजन पक्ष इन दस्तावेजों को स्वीकार करता है, तो अदालत का हिस्सा हो जाएंगे और यदि अभियोजन पक्ष इन दस्तावेजों को स्वीकार करने से इंकार करता है, बहस के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों को इन दस्तावेजों को अदालत में साबित करना होगा। ऐसे 26 दस्तावेज हैं जिन पर बचाव पक्ष के वकील भरोसा करने वाले हैं।
गौरतलब है कि स्पेशल मकोका कोर्ट के जज वाई डी शिंदे ने मुंबई लोकल ट्रेन बम ब्लास्ट का फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी, कमाल अंसारी, फैसल अता-उर-रहमान शेख, आसिफ बशीर और नवीद हुसैन को फांसी और 7 आरोपी मुहम्मद अली शेख, सुहेल शैख़ ज़मीर लतीफ़-उर-रहमान शेख , माजिद शफ़ी, साजिद मरगूब अंसारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि एक आरोपी अब्दुल वाहिद दीन मोहम्मद को सम्मानपूर्वक बरी कर दिया गया। गत वर्ष कोरोना के कारण कमाल अंसारी की नागपुर जेल में मृत्यु हो चुकी है