जांच के इंतजार में एलपीजी हादसों के भुक्तभोगी

एलपीजी के उत्पादकों व वितरकों पर कब कसेगा शिकंजा ?

हिन्द सागर, मुश्ताक खान /मुंबई: अमुमन एलपीजी रसोई गैस के रिसाव व सिलिंडरों के ब्लास्ट होने का मामला मुंबई सहित उपनगरों में तूल पकड़ता जा रहा है। लगातार हादसों को देखते हुए एलपीजी उत्पादक कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं कि जान-माल के नुकसान की भरपाई करने के बजाए, मामलों को दबाने के लिए जांच के दायरे में डाल दिया जाता है। ताकि पिढ़ित परीवार को मुआवजा देने के बाजए, उन्हें शांत कर दिया जाए। इस तरह के मामलों की जांच का परिणाम कभी भी आम नहीं होता क्यों ? जबकि ओएमसीजी (ऑय इंडिया मार्केटिंग सर्वीसेज) द्वारा नुकसान की भरपाई का प्रावधान है। लॉक डाउन से पहले एलपीजी कंपनियों द्वारा शेफ्टी क्लिनिक के जरीय उपभोक्ताओं को इसके दुष्य परिणामों से बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता था, जो अब पूरी तरह बंद है। ऐसा आरटीआई कार्यकर्ता शकील शेख का कहना है।

मिली जानकारी के अनुसार एलपीजी (रसोई गैस) सिलिंडरों के रिसाव (लिकेज ) और ब्लास्ट होने का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। आरटीआई कार्यकर्ता शकील शेख के अनुसार लॉक डाउन से पहले एलपीजी कि निर्माता कम्पनियां क्रमश : हिदुस्तान पेट्रोलियम एन्ड केमिकल्स लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम एन्ड केमिकल्स लिमिटेड (बीपीसीएल), इंडियन ऑल केमिकल्स एन्ड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (आई ओ एल) द्वारा रसोई गैस के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए शेफ्टी क्लिनिक के नाम से कार्यशालाओं का आयोजन उपभोक्ताओं के आवासीय क्षेत्र में किया जाता था। ताकि रसोई गैस का इस्तेमाल करने वाली गृहणी या रसोइया को इसके दुष्य प्रभाव और सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं को बताया जा सके । जो इन दिनों पूरी तरह से बंद है। इसका मुख्य कारण उत्पादक कंपनियों के लापरवाह अधिकारीयों व इसकी सर्तकर्ता विभाग को ही माना जा रहा है । आरटीआई कार्यकर्ता शकील शेख के अनुासार ताजा मामला साहूनगर पुलिस स्टेशन की हद में स्थित कमला नगर का है। बताया जाता है कि कमला नगर में लगातार एलपीजी हादसों के कारण यहां के नागरिकों में दहशत का माहौल है। करीब 6 माह में तीन रसोई गैस ब्लास्ट होने का मामला प्रकाश में आया है। पहला हादसा अगस्त के अंत का है। इस हादसे में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी। उस हादसे में एक ही परीवार के पांच लोग असमय काल के गाल में समा गए। जबकि उसी हादसे में जयसवार परिवार का एक मात्र बच्चा बच गया था, जो अब अमपनी बुआ के साथ वाराणसी में रह रहा है। इसके अलावा दूसरा हादसा 14 नवंबर 2021 का है। इस हादसे में समय पर स्थानीय लोगों व फायर ब्रिगेड के जवानों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया। लेकिन तिसरा हादसा भी शाहू नगर पुलिस स्टेशन की हद में स्थित कमला नगर में ही 3 फरवरी को हुआ। इस हादसे में एक महिला की मौत हो गई। सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार शाहू नगर के तीनों होदसों में एचपी का ही एलपीजी सिलिंडर था। बताया जाता है कि तिनों हादसों की जांच चल रही है। लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी पहले जाँच के परिणाम अब तक नहीं आया क्यों ?

गौरतलब है कि शेफ्टी क्लिनिक के नाम से रसोई गौस के सुरक्षित इस्तेमाल पर होने वाली कार्यशालाओं को क्यों बंद किया गया ? यह सवाल आरटीआई कार्यकर्ता शकील शेख ने तेल कंपनियों के साथ-साथ एलपीजी के वितरकों से किया है। शेख के अनुसार मुंबई सहित उपनगरों में विभिन्न कंपनियों के एलपीजी वितरकों की संख्या करीब 150 से 200 सौ है। इसके अलावा व्यावसायीक सिलिंडरों के विक्रेताओं की संख्या बेशुमार है। क्या इनमें से कोई भी ऐसा है जो ओएमसीजी के नियमों का पालन कर रहा है। इसके जिम्मेदार सीधे तौर पर निर्माता कंपनियों के संबंधित अधिकारी ही हैं। क्योंकि उन्हीं के आदेश पर शेफ्टी क्लिनिक होता था , जोकि फिलहाल पूरी तरह बंद है। शेख ने निर्माता कंपनियों के साथ-साथ वितरकों का ध्यान लोअर परेल के कमला मील कम्पाउंड के मोजोस बिस्तारा रेस्टोरेंट और कुर्ला पश्चिम के होटल सिटी किनारा कराया है। इन सबके बावजूद एलपीजी कि निर्माता कंपनियों और वितरकों को कोई फर्क नहीं पड़ता। चूकि उनके पास सबसे बड़ा हथियार जांच के नाम पर धोखा है।