पूर्व विधायक मेहता द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप में महापौर कितनी जिम्मेदार

क्या अकेले मनपा आयुक्त ने ही किया सब भ्रष्टाचार

भष्ट्राचार होने के समय महापौर ने विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया

भ्रष्टाचार का दाग मनपा शासित भाजपा के भी दामन में लगेगा

हिन्द सागर भायंदर। अभी हाल ही में भूतपूर्व विधायक नरेंद्र मेहता द्वारा मीरा भाईंदर महानगरपालिका के पत्रकार कक्ष में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोविड-19 संक्रमण के दौरान मनपा प्रशासन द्वारा जमकर घोटाला किया जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि आयुक्त ने मिराभाईंदर महानगर पालिका अधिनियम की धारा 67 का फायदा उठाते हुए बडा घोटाला किया है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जो कोविड के दौरान लगाए गए 12 एम्बुलेंस का एक महीने का भाडा मनपा ने 72 लाख रुपया चुकाया है जबकि इसे 10 महिने का जोडकर देखे तो 7 करोड रुपये से भी ऊपर होता है। इतने पैसे मे तो 12 नई गाडिय़ां मनपा के पास अपनी खुद की होती। इसी तरह 2400 रुपये में मिलने वाले वेड का भाडा 12000 रुपए, 2500 रुप स्टैड फैन का भाडा 5500 रुपए, 300 रुपए कुर्सी का भाडा 550 रुपए चुकाया गया है। इसी तरीके से मनपा द्वारा हर छोटे से बड़े काम में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। जबकि इसी सिलसिले में एक महीना पहले भाजपा के नगरसेवक श्रीप्रकाश जिलेदार सिंह उर्फ मुन्ना ने पत्रकार कक्ष में पत्रकारों के समक्ष सभी उत्पादों को प्रस्तुत करते हुए मूल्यांकन सहित मनपा बिल को दिखाते हुए भ्रष्टाचार की बात कही थी। उस समय कुछ पत्रकारों ने मेहता से इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए थी परंतु मेहता द्वारा इस मामले पर नीरसता दिखाई गई। जबकि उसके एक महीना बाद ही इसी मामले पर भूतपूर्व विधायक द्वारा स्वयं पत्रकारों के सामने आकर भ्रष्टाचार को उजागर करना कहीं न कहीं अपने आप में संदेहास्पद लग रहा है।
समाज के कुछ वुद्धिजीवियों का कहना है कि इस मामले पर गहनता से विचार करने पर लगता है कि मेहता द्वारा मनपाकर्मीयो पर दबाव बना कर विषेश कार्यसिद्धि की योजना बनाया जा रहा है। आम तौर पर सोचने वाली बात है कि इस घोटाले मे मनपाकर्मी, आयुक्त या महापौर किस किस की संलिप्तता हो सकती है, यह तो जांच का विषय है। क्योकि मेहता के अनुसार इतना बडा घोटाला करने वाला मनपा आयुक्त जो नियमो से खेलकर घोटाला करें बह अनाडी तो होगा नहीं।

भ्रष्टाचार में सत्ताधारी भाजपा की भागीदारी
जिस तरह से मेहता कोविड -19 के दौरान हुए भ्रष्टाचार का आरोप मनपा पर लगा रहे हैं उससे मनपा में सत्तासीन भाजपा भी अछूती नहीं रह सकती। भाजपा पार्टी की ही नगरसेविका ज्योत्स्ना हस्नाले मनपा मे महापौर पद पर आसीन हैं। अगर मनपा में भ्रष्टाचार हुआ है तो इसमें सत्तासीन पार्टी और महापौर की भी प्रमुखता पूर्ण रूप से मानी जाएगी, क्योंकि महापौर ज्योत्सनाले जिस वार्ड से आती हैं वह अपने आप में ही एक भ्रष्टाचार को परवान चढ़ाने वाला वाला एरिया है। महापौर ज्योत्सना हस्नाले डचकूल पाडा एरिया से पिछले चार बार से नगरसेविका बनती आ रही हैं। जबकि डचकुल पाडा में ही सारे अवैध बांधकाम की शिकायत मनपा को समय-समय पर मिलती रहती है। इनके वार्ड मे खुले गटर, गटर की सफाई, आरोग्य तथा स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती हुई नजर आती है। जिस वार्ड की नगरसेविका ही महापौर हो उसके वार्ड में इतनी चरम पर अवैध बांधकाम और अवस्थाएं हो ऐसे में मनपा में भ्रष्टाचार का उजागर होना यह सिद्ध करता है इन सभी भ्रष्टाचारियों में मनपा महापौर के योगदान विना संभव नहीं है।

भ्रष्टाचार पर शिकायत क्यों नहीं

मेहता द्वारा लगाए जा रहे भ्रष्टाचार की जरा सी भी भनक महापौर को क्यों नहीं लगी। अगर महापौर पद पर रहते हुए जनता के लिए लगन से काम कर रही हैं तो उनको समय रहते सभी कार्यो की जानकारी हुई होगी और उनकी जानकारी में ही सारे भ्रष्टाचार हुए होंगे। अगर भ्रष्टाचार की संभावना बनी तो उस समय महापौर ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई, अब भ्रष्टाचार होने के बाद अगर उन्हीं के पार्टी के भूतपूर्व विधायक द्वारा यह शिकायत किया जा रहा है तो इसमें प्रथम दृष्टया दोषी महापौर ज्योत्सना हस्नाले को ही माना जाएगा। क्योंकि प्रशासन के समानांतर जनता की हितो के लिए आवाज उठाने हेतु ही जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजा जाता है। ऐसे मे जनप्रतिनिधि का मौन रहना ही उनकी अयोग्यता और भ्रष्टाचार को जन्म देता है। अगर ऐसे मामलो की जांच शुरू हो तो सर्वप्रथम जनता को धोखे मे रखकर मोटी कमाई करने वाले जनप्रतिनिधियों से ही जांच की शुरुआत किया जाना चाहिए। अभी भ्रष्टाचार का खुलासा करने के बाद भी महापौर के इलाके में धड़ल्ले से रात दिन अवैध बांधकाम जोरों पर जारी है। इनके वार्ड में सभी गटर खुले हुए हैं पीने के पानी की हालत इतनी बदतर है कि उसमें सीवेज का पानी मिक्स हो रहा है। जगह-जगह कूड़ा कचरा फैला पड़ा है। पूरे वार्ड में गंदगी फैली हुई है। फिर भी महापौर ज्योत्सना हस्नाले उद्घाटन करने और फोटो खिचाने मे व्यस्त हैं। ऐसी लपरवाह महापौर रहेंगी तो भ्रष्टाचार का जन्म होना लाजमी है।

पाण्डेय का पंच
विशेष ध्यान देने योग्य बात तो यह है कि कोविड-19 के दौरान 80% ठेकेदार भाजपा और शिवसेना पार्टी के ही थे। प्रमुख सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस एम्बुलेंस भाडा घोटाले की बात मेहता कर रहे हैं उन एम्बुलेंसो का ठेकेदार भाजपा पार्टी का ही था। इसी तरह जो प्रवासी मजदूरों के खाने मे घोटाला हुआ है उसका ठेका शिवसेना पार्टी के ठेकेदार का था। “चोर-चोर मौसेरे भाई के तर्ज पर हमाम मे सभी नंगे हैं बस बात इतनी सी है कि कौन कितना दिख रहा है”। अगर सच्चाई का पता लगाना ही है तो इन ठेकेदारों की जाँच होनी चाहिए।